Looop Lapeta Movie Review हिंदी में 

कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनसे आप पहले दृश्य से जुड़ सकते हैं, जबकि कुछ पटकथाएं ऐसी होती हैं जिन्हें बढ़ने में समय लगता है, लेकिन वो दर्शकों पर प्रभाव डालने में सफल हो जाती है. तापसी पन्नू और ताहिर राज भसीन की लूप लपेटा दूसरी कैटेगरी में आती हैं.

फिल्म एक निराश एथलीट सावी (पन्नू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो उसके बॉयफ्रेंड सत्या (भसीन) की कहानी है जो ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं जहां सावी अपने प्रेमी को बचाने के लिए समय के खिलाफ दौड़ती है, जो लापरवाही से एक स्थानीय बस में एक डकैत का पैसों से भरा बैग खो देता है. आगे क्या होता है ये आपको फिल्म में देखना है.

लूप लपेटा शुरूआत धीमी गति से होती है जो थोड़ी देर के लिए भ्रम से निराशा की ओर बढ़ता है. बीच में ये आपको अपनी कहानी में बांध लेता है क्योंकि आप जानना चाहते हैं कि उस स्थिति में आखिरकार क्या होने वाला है, लेकिन पटकथा को वहां तक पहुंचने में काफी समय लगता है.

हालांकि, एक बार जब कहानी अपने अंतिम चरण में पहुंच जाती है तो यह एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ आती है, जो काफी बुनियादी है. दोहराए जाने वाले पटकथा में सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों को बांधे रखना है.

फिल्म की शूटिंग गोवा में हुई है. तापसी और ताहिर इस फिल्म को लीड कर रहे हैं. वहीं श्रेया धनवंतरी, राजेंद्र चावला, समीर केविन रॉय और दिब्येंदु भट्टाचार्य लोगों ने महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाएँ निभाई हैं.

सभी कलाकार अपनी भूमिकाओं पर खरे उतरे हैं, लेकिन ताहिर राज भसीन का अभिनय जबरदस्त है. एक एक्टर के तौर पर उनकी बहुमुखी प्रतिभा शानदार ढंग से सामने आती है.

लूप लपेटा फिल्म निर्माता टॉम टाइकवर की 1998 की जर्मन फिल्म, रन लोला रन का आधिकारिक हिंदी रूपांतरण है. हालाँकि दोनों की तुलना नहीं की जा सकती.

लूप लपेटा कुछ कॉमेडी सीन में सपाट हो जाता है और पीछा करने वाले दृश्य कई बार लंबे भी लगते हैं, लेकिन आखिर में फिल्म की कहानी, शानदार परफॉरमेंस और मजबूत तकनीकी समर्थन के कारण अपनी जमीन पर कब्जा करने का प्रबंधन करती है. ये फिल्म एक बार जरूर देखी जा सकती है.